श्री राणी सती दादी जी की आरती हिंदू धर्म में बहुत लोकप्रिय है। यह आरती राजपूतों की प्रतिनिधित्व रखती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार जैसे राज्यों में श्रद्धालुओं द्वारा बड़े ही भावुकता से समर्पित की जाती है। इस आरती के बोल श्री राणी सती दादी के जीवन को दर्शाते हुए लिखे गए हैं जो उनकी शक्ति, साहस और धर्म के प्रति अविचल निष्ठा का प्रतीक हैं। इस आरती को गाकर श्रद्धालु उनकी आराधना करते हैं और उनसे आशीर्वाद मांगते हैं।

श्री राणी सती दादी जी की आरती

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ।
अपने भक्त जनन की,
दूर करन विपत्ती ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत,
मंडितचहुँक कुंभा ।
दुर्जन दलन खडग की,
विद्युतसम प्रतिभा ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल,
शोभा लखि न पडे ।
ललित ध्वजा चहुँ ओरे,
कंचन कलश धरे ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

घंटा घनन घडावल बाजे,
शंख मृदुग घूरे ।
किन्नर गायन करते,
वेद ध्वनि उचरे ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

सप्त मात्रिका करे आरती,
सुरगण ध्यान धरे ।
विविध प्रकार के व्यजंन,
श्रीफल भेट धरे ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

संकट विकट विदारनि,
नाशनि हो कुमति ।
सेवक जन ह्रदय पटले,
मृदूल करन सुमति ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

अमल कमल दल लोचनी,
मोचनी त्रय तापा ।
त्रिलोक चंद्र मैया तेरी,
शरण गहुँ माता ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥

या मैया जी की आरती,
प्रतिदिन जो कोई गाता ।
सदन सिद्ध नव निध फल,
मनवांछित पावे ॥

ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ।
अपने भक्त जनन की,
दूर करन विपत्ती ॥

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